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हिमाचल प्रदेश: एक साथ उठीं तीन अर्थियां तो रो पड़ा कांगड़ा का झुनैना गांव, किसी ने बेटा खोया तो किसी ने पिता

झुनैना गांव में एक साथ उठीं तीन अर्थियां, हर आंख हुई नम

पांच साल के बेटे ने अशोक को दी मुखाग्नि, पिता ने इकलौते बेटे प्रिंस को कांपते हाथों से विदा किया

सड़क हादसे में तीन परिवारों का सहारा छिना, ग्रामीणों ने सरकार से आर्थिक मदद की मांग की


शाहपुर के भलेड़ पावर हाउस के पास हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने झुनैना गांव को गहरे सदमे में डाल दिया। हादसे में जान गंवाने वाले गांव के तीन युवकों अशोक कुमार, प्रिंस और पवन कुमार का रविवार को पैतृक श्मशानघाट में एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। एक साथ तीन नौजवानों की अर्थियां उठीं और चिताएं जलीं तो पूरा गांव गम में डूब गया। परिवारों की चीख-पुकार के बीच माहौल बेहद मार्मिक हो गया और हर आंख नम नजर आई।

पांच साल के बेटे ने दी पिता अशोक को मुखाग्नि

अंतिम संस्कार के दौरान सबसे भावुक दृश्य उस समय सामने आया, जब 38 वर्षीय अशोक कुमार को उनके महज पांच साल के मासूम बेटे ने मुखाग्नि दी। पिता को अंतिम विदाई देते समय मासूम बेटे को देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं। इतनी कम उम्र में पिता की चिता को मुखाग्नि देते बच्चे का दृश्य पूरे गांव के लिए बेहद पीड़ादायक रहा।

वहीं, परिवार के इकलौते बेटे 18 वर्षीय प्रिंस को उसके पिता पूरन चंद ने कांपते हाथों से मुखाग्नि देकर विदा किया। प्रिंस के माता-पिता के लिए यह सबसे कठिन पल था। दूसरी ओर, 30 वर्षीय पवन कुमार की चिता को उनके बड़े भाई ने मुखाग्नि दी।

एक ही गांव से तीन युवकों की अर्थियां एक साथ उठने से झुनैना में शोक की लहर दौड़ गई। जिन घरों में परिवार के सदस्य अपने भविष्य की उम्मीदों के साथ जी रहे थे, वहां अचानक मातम छा गया।

धार्मिक सम्मेलन में शामिल होने जा रहे थे तीनों युवक

बताया गया कि तीनों युवक शुक्रवार रात एक धार्मिक सम्मेलन में शामिल होने के लिए जा रहे थे। रास्ते में दूली काकड़ा के पास भूस्खलन होने के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा।

इसी दौरान भलेड़ के पास उनकी बाइक अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे गहरी खाई में जा गिरी। इस हादसे में तीनों युवकों की मौत हो गई। घटना ने झुनैना गांव को गहरे सदमे में डाल दिया।

रविवार को जब तीनों युवकों की अर्थियां उनके पैतृक श्मशानघाट पहुंचीं तो बड़ी संख्या में ग्रामीण अंतिम विदाई देने के लिए उमड़ पड़े। एक साथ तीन चिताएं जलने का दृश्य देखकर हर कोई भावुक हो गया।

प्रिंस था माता-पिता का इकलौता बेटा, परिवार को थीं बड़ी उम्मीदें

हादसे में जान गंवाने वाला 18 वर्षीय प्रिंस अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसने हाल ही में 12वीं की पढ़ाई पूरी की थी। परिवार को उससे भविष्य की बड़ी उम्मीदें थीं। माता-पिता के लिए वह बुढ़ापे का सहारा माना जा रहा था।

जिस बेटे के भविष्य को लेकर परिवार ने कई सपने संजोए थे, उसकी अचानक मौत ने माता-पिता को गहरे दुख में डाल दिया। अंतिम संस्कार के दौरान पिता पूरन चंद ने कांपते हाथों से अपने इकलौते बेटे को मुखाग्नि दी।

अशोक और पवन मजदूरी कर पाल रहे थे परिवार

वहीं, अशोक कुमार और पवन कुमार मजदूरी कर अपने परिवारों का पालन-पोषण कर रहे थे। दोनों अपने परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सहारा थे। उनकी मौत के बाद परिवारों के सामने अपनों को खोने के दर्द के साथ आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है।

एक ही हादसे ने तीन परिवारों को ऐसा दुख दिया, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। किसी परिवार ने अपना इकलौता बेटा खोया तो किसी परिवार से कमाने वाला सदस्य हमेशा के लिए चला गया।

अंतिम संस्कार में आसपास के गांवों से भी पहुंचे लोग

रविवार को झुनैना के श्मशानघाट में आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। ग्रामीणों ने नम आंखों से तीनों युवकों को अंतिम विदाई दी और शोक संतप्त परिवारों को ढांढस बंधाया।

अंतिम संस्कार के दौरान पूरे गांव में मातम पसरा रहा। परिवारों की चीख-पुकार और तीनों युवकों की एक साथ अंतिम विदाई ने माहौल को बेहद गमगीन कर दिया।

अंतिम संस्कार में जिला परिषद सदस्य संदीप ठाकुर, दरीणी पंचायत के प्रधान गगन सिंह, उपप्रधान हंसराज, वार्ड सदस्य किरण देवी समेत कई ग्रामीण मौजूद रहे।

ग्रामीणों ने सरकार से तत्काल आर्थिक मदद की मांग उठाई

तीनों परिवारों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने सरकार से पीड़ित परिवारों की तत्काल आर्थिक मदद करने की मांग उठाई है। ग्रामीणों ने कहा कि हादसे में तीन परिवारों का सहारा छिन गया है और उन्हें जल्द राहत की जरूरत है।

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और उपमुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया से आग्रह किया कि तीनों परिवारों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्हें जल्द राहत प्रदान की जाए।

झुनैना गांव में रविवार का दिन कभी न भूल पाने वाला बन गया। एक साथ तीन अर्थियां उठीं, तीन चिताएं जलीं और गांव ने अपने तीन युवकों को नम आंखों से अंतिम विदाई दी।